व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपण विधियां

व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां
Projective Method of Personality

व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपण विधियों पर विचार करने से पूर्व 'प्रक्षेपण' शब्द का अर्थ जानना आवश्यक है। प्रक्षेपण का अर्थ है-- फेंकना। प्रक्षेपण शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सुप्रसिद्ध मनोविश्लेषण वादी (psychoanalysis) सिगमंड फ्रायड (Sigmund freud) (1849) ने किया।
यह वह क्रिया है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, इच्छाओं, संवेगो आदि का अन्य व्यक्तियों या बाह्य जगत के माध्यम से सुरक्षात्मक रूप प्रस्तुत करता है। वारेन के अनुसार-- यह वह प्रवृत्ति है जिसमें व्यक्ति बाह्य जगत में अपनी दमित मानसिक प्रक्रियाओं का प्रक्षेपण करता है।
व्यक्तित्व मापन की विधियां, व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां
Projective method of personality

√ मैकडोनल्ड लैडैल के अनुसार-- "प्रक्षेपण एक ऐसी मनोवैज्ञानिक रचना है जिसमें व्यक्ति दूसरों पर ऐसी भावनाओं और संवेगों को प्रक्षेपित करता है जिसका उसने दमन कर लिया हो।"
 इन परिभाषाओं के आधार पर प्रक्षेपण का अर्थ है कि साधारण रूप से व्यक्ति के सम्मुख उद्दीपक स्थिति प्रस्तुत की जाती है तथा उसे ऐसा अवसर प्रदान किया जाता है कि वह अपने व्यक्तिगत जीवन से संबंधित छिपी हुई बातों को उन परिस्थितियों के माध्यम से प्रकट कर सके। 
√ फ्रीमैन के अनुसार-- इन विधियों का संबंध प्राय: व्यक्तित्व के अचेतन पक्ष से होता है। अर्थात प्रक्षेपी विधियां व्यक्ति के चेतन व्यक्तित्व से संबंधित सूचनाएं प्रदान करने के अतिरिक्त अचेतन स्तर पर दबी हुई आंतरिक भावनाओं तथा व्यक्तित्व संरचना का मापन करती है यह व्यक्ति के अचेतन मन का मापन करती है जो संपूर्ण मन का 9/10 भाग है।
* प्रक्षेपण विधि क्या है
प्रक्षेपण विधियों का आशय है कि अचेतन मन में दबे संवेगों, भावनाओं आदि को किन्हीं व्यवहारों के माध्यम से बाहर निकालना।
व्यक्ति के अचेतन मन में अनेक भावनाएं, इच्छाएं, संवेगात्मक द्वंद्व आदि दबे रहते हैं जो उसके संतुलन को प्रभावित करते हैं जिनको बाहर निकालना आवश्यक होता है।
 प्रक्षेपण विधियों के माध्यम से इन छिपे व्यवहरों का अध्ययन किया जाता है और उन्हें बाहर निकाला जाता है। अर्थात जैसा व्यक्ति के मन में होता है वह बाह्य वस्तु को वैसे ही देखता है।
व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियां

1.रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण Rorschach Ink Blot Test

स्याही धब्बा परीक्षण का प्रतिपादन स्विट्जरलैंड के मनोचिकित्सक हर्मन रोर्शा है। जिन्होंने 1921 में इस परीक्षण का निर्माण किया। इसमें 10 कार्ड होते हैं जिनमें से पांच काले एवं परीक्षण में गत्ते पर स्याही के 10 धब्बे होते हैं। 2 कार्डों पर लाल और काले तथा 3 कार्डों पर विभिन्न रंग की आकृतियां बनी होती है। इन कार्डों के माध्यम से व्यक्ति के अचेतन मन की स्थिति की जानकारी प्राप्त हो जाती है।
 जिस व्यक्ति के व्यक्तित्व का मापन करना होता है उसे परीक्षण कर्ता एक कार्ड देता है और व्यक्ति उसे देख कर कोई विवरण-कहानी प्रस्तुत कर देता है। इस परीक्षण के माध्यम से उसकी बुद्धि, सामाजिकता, समायोजन, संवेगात्मक स्थिति, कल्पनाशीलता, अहम् की शक्ति आदि पक्षों का अध्यन किया जाता है। एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक ही रॉर्सचाक परीक्षण को प्रशासित कर सकता है।

2. प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण Thematic Apperception Test (TAT परीक्षण)

थेमेटिक एपरेसिएशन टेस्ट की रचना मुरे एवं मार्गन ने 1935 में की थी। इस परीक्षण में 30 चित्रों के कार्ड होते हैं तथा एक कार्ड खाली होता है। (कुुल 31) सभी चित्र प्राय: अर्धनिर्देशित (semi structured) होते हैं। इनमें 10 कार्ड केवल पुरुषों के लिए, 10 कार्ड केवल स्त्रियों के लिए तथा 10 कार्ड दोनों के लिए होते हैं। परीक्षण के समय एक प्रयोज्य पर प्रायः 20 कार्डों का प्रशासन किया जाता है। इन्हें दो सत्रों में प्रकाशित किया जाता है। प्रत्येक सत्र में 10 कार्डो का प्रशासन किया जाता है। प्रत्येक कार्ड को दिखा कर अलग अलग कहानी लिखाई जाती है। प्रत्येक कहानी के लिए पांच-पांच मिनट का समय दिया जाता है। अंतिम खाली कार्ड पर अलग से विषय या प्रयोज्य से कहानी लिखवाई जाती है इसके बाद इसका विश्लेषण किया जाता है।
 कहानी में वर्णित पात्रों व उनके चरित्र चित्रण से विषयी के व्यक्तित्व की झलक मिल जाती है इस प्रकार निर्मित कहानी की व्याख्या से व्यक्ति के अंतर्दंद्व,संवेगात्मक स्थिति, आवश्यकताओं, असामान्य व्यवहार एवं समस्याओं आदि का पता लगाया जाता है। इस प्रकार इन चित्रों के देखकर लिखी गई कहानियों का विश्लेषण कहानी में वर्णित मुख्य पात्र की आवश्यकताओं के दबावों के आधार पर किया जाता है।


3. बालकों का अंतर्बोध परीक्षण Children Apperception Test (CAT परीक्षण)

जहां टी ए टी परीक्षण का प्रयोग व्यस्कों पर किया जाता है वही सी ए टी परीक्षण बालकों के लिए उपयुक्त होता है। इस परीक्षण का सर्व प्रथम प्रकाशन लियोपोल्ड बैलक ने सन 1948 में किया। भारतीय परिस्थिति के लिए इसका संशोधन एवं अनुकूलन कोलकाता की उमा चौधरी ने किया है। यह परीक्षण 3 से 11 वर्ष तक की आयु वाले बालकों के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने के लिए उपयुक्त है। इसमें कुल 10 चित्र होते हैं। प्रत्येक पर जानवरों के चित्र अंकित हैं।
इन चित्रों के माध्यम से बालकों की परिवार संबंधी, सफाई संबंधी, प्रशिक्षण आदि अनेक समस्याओं व आदतों की जानकारी होती है। बुद्धि का स्तर, चिंतन की विशेषताएं, मानसिक द्वंद्व, सामाजिक संबंध एवं अहम की शक्ति आदि विशेषताओं का पता इस परीक्षण से लगता है।

4. रोजेनविग पी एफ परीक्षण Rosenzweig P.F. Study

इस परीक्षण का निर्माण अमेरिका के मनोवैज्ञानिक रोजेनविग ने अपने दबाव व भग्नासा के सिद्धांत के आधार पर किया। यह अर्ध प्रक्षेपण परीक्षण है जो तीन रूपों में है, पहला - 4 से 13 वर्ष के बालकों के लिए। दूसरा - किशोरों के लिए तथा तीसरा - वयस्कों के लिए। बालकों व वयस्कों के परीक्षण का भारतीय परिस्थिति के अनुकूल उदय पारीक ने किया है। इस परीक्षण में 24 चित्र होते हैं।
प्रत्येक चित्र में एक व्यक्ति की कुंठा उत्पन्न करने वाला वाक्य कहता है और उत्तर देने वाला एक वाक्य में उसकी प्रतिक्रिया लिख देता है। इस तरह प्रत्येक वाक्य का मूल्यांकन विश्लेषक द्वारा किया जाता है जिसके आधार पर आक्रामकता, समूह अनुरूपता, समायोजन, कुसमायोजन आदि की जानकारी होती है।

5. वाक्य पूर्ति परीक्षण Sentence Completion Test

प्रक्षेपण विधियों में वाक्य पूर्ति परीक्षण भी महत्वपूर्ण है। जिसमें कुछ अधूरे वाक्यों को शीघ्र पूरा करने के लिए विषयी को कहा जाता है। वाक्य विषयी की व्यक्तित्व के शील गुणों को अभिव्यक्त करने वाले होते हैं। ये लिखित रूप में होते हैं। इसलिए शिक्षित व्यक्तियों पर ही इसका प्रशासन किया जा सकता है।
  इस विधि का प्रवर्तन सर्वप्रथम 1910 में पाइने व टेण्डलर ने किया। इसमें कुल 20 वाक्य थे, जैसे-मैं सुख का अनुभव करता हूं क्योंकि.......। इन वाक्यों में विषयी की इच्छा,भय आदि से संबंधित वाक्य होते हैं। इस तरह व्यक्तित्व के गुणों का बोध इस विधि से होता है।

6. शब्द साहचर्य परीक्षण Word Association Test

इस परीक्षण का सर्वप्रथम प्रयोग गाल्टन ने सन 1879 में किया। उन्होंने 75 शब्दों की एक सूची बनाई और देखा कि साहचर्य शब्दों के स्मरण से कुछ मानसिक चित्र एवं प्रतिभाएं मस्तिष्क में अंकित हो जाती है। इसके बाद युंग ने 1910 में संवेगात्मक मनो ग्रंथियों का पता लगाने के लिए शब्द साहचर्य विधि को पूर्ण विकसित किया।
इस विधि में विषयी के सम्मुख एक उत्तेजक शब्द प्रस्तुत किया जाता है और उससे कहा जाता है कि वह इस शब्द को सुनते ही उस शब्द का प्रतीचार करें जो उसके मन में आए उसे शीघ्रता से करें।
 युंग ने प्रतिक्रिया शब्दों को निम्नलिखित पांच श्रेणियों में विभाजित किया-- 1.अहम केंद्रित 2.वर्गोपरि 3.विरोधी शब्द 4.अन्यान्य 5. बोलने की आदत। इसके आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व की विशेषताएं पता लगती है।
  उदाहरण के लिए-- उद्दीपक शब्द प्यार (Love) है तथा प्रतिक्रिया शब्द मां है तो स्पष्ट है कि विषयी मां के प्रति प्रतिक्रिया बताता है। 7. खेल तथा ड्रामा विधि (Play and Drama Method):- खेल तथा ड्रामा व्यक्तित्व मापन की अच्छी विधि मानी जाती है। क्योंकि इसमें परीक्षार्थी अपनी भावनाओं का स्वतंत्र प्रदर्शन कर सकता है। इसका नैदानिक महत्व परीक्षक की पर्यवेक्षण क्षमता तथा परीक्षार्थी की भावना प्रदर्शन कला के विश्लेषण पर निर्भर है। इसमें वे कथानक भी सम्मिलित हैं जिन्हें शिक्षार्थी खेलते समय उच्चारित करता है।
 इस विधि के निर्माता प्रसिद्ध वैज्ञानिक जे एल मोरेनो थे जिन्होंने अपने प्रयोग वियना (Vienna) में किए। इस प्रकार की विधि में परीक्षार्थी जब नाटक खेलता है तो अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करता है, अपनी समस्याओं को दिखाता है, जिससे वह उनके समाधान हेतु कोई रास्ता पा सके। इस विधि की विश्वसनीयता एवंं वैधता जानने के लिए कोई खास प्रयत्न नहीं किए गए। इस विधि में पर्यवेक्षण विधि का सहारा लेना पड़ता है और पर्यवेक्षण विधि स्वयं अप्रमापीकृत है।
व्यक्तित्व मापन की सभी प्रक्षेपण विधियों का उद्देश्य बालक के अचेतन मन में छिपी भावनाओं का किसी अन्य के माध्यम से प्रक्षेपण करना है। जिसके आधार पर उसके व्यक्तित्व की जानकारी होती है। व्यक्तित्व मापन की उपयुक्त विधियों के साथ व्यक्तित्व के पश्चात अगली पोस्ट मे व्यक्तित्व के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला जाएगा। 

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां