सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के अंतर्गत CCE, CCP और ABL - एक नजर में

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन Continue And Comprehensive Evolution (CCE), CCP क्या है, और गतिविधि आधारित शिक्षण Activity Based Learning (ABL)

SIQE, CCE, CCP, ABL
SIQE के अंतर्गत CCE, CCP और ABL - एक नजर में

 पृष्ठभूमि :-
State Initiative for Quality Education in hindi
 शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था सरकार का दायित्व है। प्रारंभिक शिक्षा में विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर उन्नयन के उद्देश्य से राज्यों में State Initiative for Quality Education Programme (SIQE) संचालित किया जा रहा है। इसके तहत राज्यों में शिक्षकों की क्षमता संवर्धन के साथ-साथ गतिविधि आधारित बाल केंद्रित शिक्षण के आधार पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continue And Comprehensive Evolution CCE) प्रक्रिया को अपनाया गया है।

CCE, CCP और ABL के उदेश्य

• बाल केंद्रित शिक्षण द्वारा सीखने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना।
• बच्चों में परीक्षा के भय को दूर करना।
• गतिविधि आधारित शिक्षण द्वारा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को रुचिकर, आनंददायी एवं प्रभावी बनाना।
• ज्ञान को स्थायी एवं प्रभावी बनाते हुए प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करना।
• बच्चों में सृजनात्मक एवं मौलिक चिंतन का विकास करना।
• स्तरानुसार शिक्षा योजना बनाकर शिक्षण कार्य करते हुए शैक्षिक प्रगति को नियमित रूप से दर्ज करना।
• बच्चों को अवसर उपलब्ध करवाते हुए संज्ञानात्मक एवं व्यक्तित्व विकास के सभी पक्षों का मूल्यांकन करना।
• बालकों के अधिगम स्तर में गुणात्मक विकास के साथ-साथ नामांकन एवं ठहराव में वृद्धि करना।
• बच्चों की प्रगति को अभिभावकों के साथ साझा करना।

• बाल केंद्रित शिक्षण शास्त्र (CCP)

 बाल केंद्रित शिक्षण शास्त्र का अर्थ है बच्चे के अनुभव, स्तर और सक्रिय सहभागिता को प्राथमिकता देना। इस प्रकार के शिक्षण में बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास व अभिरूचियों  के मद्देनजर शिक्षा को नियोजित करने की आवश्यकता है। बाल केंद्रित शिक्षण में प्रत्येक बच्चा महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में बच्चों के अनुभवों, विचारों व सहभागिता को प्राथमिकता दी जाती है।
 राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (National Curriculum Fremwork  NCF 2005 in hindi) में कक्षा कक्ष शिक्षण एवं मूल्यांकन के उद्देश्यों में स्पष्ट किया गया है कि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में बच्चों के सार्थक और आनंददायी अनुभव एवं संदर्भों को केंद्रित करते हुए भय मुक्त मूल्यांकन के प्रयास किए जाएं।
प्रत्येक बच्चे को कार्य करके सीखने के पर्याप्त अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए शिक्षक द्वारा योजना का निर्माण किया जाता है। इसमें शिक्षक एक मददगार के रूप में कार्य करते हुए बच्चों को अपने स्वतंत्र विचार रखने के लिए प्रेरित करते हैं। जिससे बच्चे अपने अनुभव, विचार और सहभागिता के आधार पर ज्ञान की रचना स्वयं करते हैं। इसमें विद्यार्थियों की सक्रियता व रचनात्मक सामर्थ्य को पोषित एवं संवर्धित करने के पर्याप्त अवसरों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

गतिविधि आधारित अधिगम (Activity Based Learning ABL)

 राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (National Curriculum Fremwork NCF 2005) के अनुसार प्रत्येक बच्चा अपनी गति, स्तर एवं रूचि के अनुसार सीखता है। Right to Free and Compulsory Child Education Act 2009 की धारा 29 (ङ) के अनुसार सीखने-सिखाने की प्रक्रिया बालकों के अनुरूप गतिविधि आधारित एवं खोजने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाली हो। इस हेतु सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) में प्रत्येक बच्चे के सीखने को सुनिश्चित करने के लिए गतिविधि आधारित अधिगम (Activity Based Learning ABL) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में बच्चों के स्तरानुसार गतिविधियों में परिवर्तन कर वांछित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया में बाल केंद्रित शिक्षण शास्त्र के अनुसार गतिविधि आधारित अधिगम करवाते हुए सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किया जाता है। जिससे बच्चे अपने गति, रुचि और स्तर के अनुसार ज्ञान का निर्माण कर सकें।
 गतिविधि कक्ष का विकास : गतिविधि आधारित शिक्षण हेतु विद्यालय में कक्षा 1 व 2 के लिए गतिविधि कक्ष का विकास विषयवार अधिगम स्तरानुसार कर बच्चों के लिए इस प्रकार का वातावरण तैयार किया जाता है, जिससे शिक्षण अधिगम रूचिकर एवं आनंददायी और प्रभावी बनाने सके। इस हेतु श्यामपट्ट, डॉट बोर्ड और बॉक्स बोर्ड तथा डिस्प्ले बोर्ड, समूह में कार्य करने के लिए चौकी तथा हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषयों के लिए दीवार लेखन निहित है।
 गतिविधि आधारित अधिगम किट : कक्षा 1 व 2 में सक्रिय अधिगम (Active Learning) को प्रभावी बनाने के लिए गतिविधि कार्ड, फ्लैश कार्ड, चार्ट, विषयवार कार्य पत्रक, चयनित एवं नियोजित गतिविधि अनुरूप सामग्री को आधार बनाकर समूहवार शिक्षण कार्य और शिक्षण कार्य संपादित किया जाता है।

• सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रक्रिया (CCE)

 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के महत्वपूर्ण घटक हैं -
* सततता - मूल्यांकन की स्वतंत्रता का आशय लगातार एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया से है। यह प्रक्रिया शिक्षण के दौरान सतत अवलोकन, कक्षा शिक्षण, समीक्षा व नियोजन आदि से सीधी-सीधी जुड़ी हुई है।
* व्यापकता - मूल्यांकन की व्यापकता में मूल्यांकन के क्षेत्रों एवं तरीकों की व्यापकता अंतर्निहित है। यह बालक को उपलब्ध करवाए जाने वाले अवसरों, तरीकों व अनुभवों में देखी जा सकती है।

आकलन एवं मूल्यांकन

आकलन छोटे-छोटे उद्देश्यों के साथ किया जाता है। आकलन मूल्यांकन का आधार है। आंकलन से कार्य की क्रिया में निरंतर सुधार किया जाता है। यह मूल्यांकन प्रक्रिया का ही हिस्सा है। आकलन में संभावनाएं व्याप्त होती है। मूल्यांकन बड़े लक्ष्य को इंगित करता है तथा निश्चितता का बोध कराता है। आकलन के कुछ चरणों को मिलाकर समग्रता में मूल्यांकित करना ही मूल्यांकन है। मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिससे यह पता लगता है कि अपेक्षित दक्षताएं किस स्तर तक विकसित हो पाई है।

• एक शैक्षिक सत्र के लिए योजना एवं आंकलन की संरचना

प्रत्येक कक्षा एवं विषय के अधिगम उद्देश्यों को व्यवस्थित करते हुए शिक्षण सत्र को 3 या 4 टर्म में विभाजित किया गया है। CCE की प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्न अनुसार हैं -
1. आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन
 सत्र के आरंभ में कक्षा कक्ष प्रक्रिया के दौरान मौखिक, कार्यपत्रक एवं गतिविधियों के आधार पर बच्चों का आकलन कर उपलब्धि को दर्ज करते हुए आधार रेखा मूल्यांकन किया जाता है तथा प्रत्येक टर्म के अंत में योगात्मक आंकलन/ मूल्यांकन से प्राप्त स्तरों की प्रगति के आधार पर आगामी टर्म के लिए पदस्थापन किया जाता है।
2. शिक्षण आकलन योजना
 आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन से प्राप्त करने संयंत्र को शिक्षक द्वारा अपनी अध्यापक योजना डायरी में संधारित किया जाता है और इस आधार पर शिक्षण एवं आकलन की योजना का निर्माण कर तदनुरूप कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया में शिक्षण करते हुए मूल्यांकन किया जाता है।
3. रचनात्मक आंकलन
 किसी कौशल/पाठ सूचक/अवधारणा एवं उप-अवधारणा के अपेक्षित उद्देश्यों के सापेक्ष स्थिति का आकलन करने हेतु कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया के दौरान प्रगति (ग्रेड) को रचनात्मक आकलन की चेकलिस्ट में नियमित संधारित किया जाता है।
4. योगात्मक आंकलन/मूल्यांकन
 टर्म के अंत में योगात्मक आंकलन/मूल्यांकन में ग्रेड दर्ज करने के लिए निम्न दस्तावेजों को आधार बनाया जाता है - चैक लिस्ट (Check List), स्व-अनुभव/समिक्षा, कक्षा कार्य (Class Work), गृह कार्य (Home Work), पोर्टफोलियो (Portfolio), वर्कशीट (Work Sheet), पेपर-पेन्सिल टेस्ट (PPT) और अभिभावक संवाद इत्यादि। इस प्रक्रिया में मूल्यांकन के आधार यथा व्यक्तिगत, समूह, स्वमूल्यांकन और सहभागिता है। इसमें बालक के अकादमिक पक्षों के साथ ही अन्य सभी पक्षों यथा कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा व्यक्तित्व विकास के सापेक्ष साक्ष्यों को सम्मिलित किया जाता है।
5. ग्रेड दर्ज करने की प्रक्रिया
 सतत एवं व्यापक आकलन/मूल्यांकन में बच्चों की शैक्षिक उपलब्धि को 3 ग्रेड्स A, B, C के द्वारा दर्ज किया जाता है। जिसमें -
A   स्वतंत्र रूप से काम करने की स्थिति या अग्रिम स्तर की समझ
B  शिक्षक की मदद/मार्गदर्शन में काम करने की स्थिति या मध्यम स्तर की समझ
C  शिक्षक की विशेष मदद से काम करने की स्थिति या आरंभिक स्तर की समझ
6. पोर्टफोलियो Portfolio
 एक निश्चित अवधि में बच्चे की उत्तरोत्तर अधिगम उपलब्धि के संचयी साक्ष्य के रूप में पोर्टफोलियो संधारित किया जाता है। इसमें बच्चे की कक्षा कक्ष प्रक्रिया में रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन के दौरान अकादमी प्रगति के साक्ष्य (तथा - आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन विषयवार नियमित कार्यपत्रक, मौखिक गतिविधियों के आधार पत्र एवं पेपर पेंसिल टेस्ट इत्यादि) के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास संबंधी दस्तावेज संकलित किए जाते हैं।
 इन संकलित दस्तावेजों पर शिक्षक द्वारा गुणात्मक टिप्पणी दर्ज कर पुष्टि प्रदान की जाती है। इसे समय-समय पर अभिभावकों से सांझा किया जाता है। यह बच्चे की प्रगति का आईना है।

• शिक्षक के रूप में दायित्व

* बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना।
* बाल केंद्रित शिक्षण (CCP) के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया संपन्न कराना।
* आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन कर समूह के अनुसार शिक्षण आकलन योजना बनाना।
* कक्षा कक्ष प्रक्रिया में योजनाअनुरूप शिक्षण सुनिश्चित करते हुए समीक्षा एवं सतत आकलन करना।
* बच्चों की शैक्षिक प्रगति को निर्धारित दस्तावेजों में नियमित दर्ज कर अभिभावकों से सांझा करना।
* प्रशिक्षण, कार्यशाला व वीसी में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना।

अवलोकन कर्ता के रूप में दायित्व

 शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अवलोकन कर्ता की भूमिका संबलनकर्ता के रूप में होनी चाहिए। अवलोकन कर्ता निम्नलिखित बिंदुओं की समिक्षा करें -
* आधार रेखा मूल्यांकन (बेसलाइन)/पदस्थापन के आधार पर समूह निर्धारण।
* समूह के अनुसार पाक्षिक योजना निर्माण एवं योजना की क्रियान्विति एवं समीक्षा की स्थिति।
* शिक्षण अधिगम सामग्री की उपलब्धता एवं उपयोग की स्थिति।
* पोर्टफोलियो, अभ्यास कार्य, चेक लिस्ट, अभिलेख पंजिका के संधारण की स्थिति।
* संस्था प्रधान द्वारा कक्षा कक्षिय प्रक्रिया एवं अभ्यास कार्य के अवलोकन की स्थिति।
* अभिभावक शिक्षक बैठक (PTM) में बच्चों की शैक्षिक प्रगति को सांझा किए जाने की स्थिति।
* गत अवलोकन कर्ता के सुझावों/निर्देशों की पालना की स्थिति।

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