प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे प्राप्त करें : टिप्स

• प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करें महत्वपूर्ण टिप्स

Important tips to get success in competitive exams
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहे है तो ये आर्टिकल आपके लिए है। मैं आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे प्राप्त करें, इसके बारे में कुछ टिप्स देने जा रहा हूं, जिसे अपनाकर आप जरूर सफल होंगे यही मेरी आशा है।
मैं यहां कोई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के टोटके, मंत्र या कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं बता रहा हूं। मैं आपको वो Tips दूंगा जो आपको निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे प्राप्त करें : टिप्स
Competitive Exam Success Tips
 हर एक प्रतियोगी परीक्षार्थी की यही कामना होती है की वो प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करें। परंतु अभ्यर्थी परीक्षाओं की तैयारी करते समय और परीक्षा के दौरान मार्गदर्शन (Guidance) के अभाव में गलतियां करते हैं जिसकी वजह से वो मैरीट से बाहर हो जाता है।
मैं यहां आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान क्या-क्या करना है और परीक्षा भवन में पेपर हल करने समय क्या-क्या करना है, पूरी जानकारी दूंगा।

परीक्षा की तैयारी हेतु टिप्स

Exam Preparation Tips
1. परीक्षा की तैयारी हेतु सबसे जरूरी है कम से कम 8 घंटे नींद। नींद लेने से दिमाग तरोताजा हो जाता है और अधिगम ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है।
2. तनावमुक्त होकर परीक्षा की तैयारी करें। ऐसी जगह पर नहीं पढ़ना चाहिए जहां शोरगुल होता है। शोरगुल के कारण अधिगम (learning) सही नहीं होगा।
3. जिस भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं उसका जो पाठ्यक्रम (Syllabus) होता है वो आपके पास होना चाहिए। और पूरा पाठ्यक्रम आपके दिमाग में होना चाहिए। पाठ्यक्रम का ध्यान में रखना आपको एक या दो प्रश्नों को हल करने में आसानी कर देगा।
अब आप सोच रहे होंगे की भला सिलेबस को याद रखना से भी कोई प्रश्न हल थोड़े होते हैं। चलिए एक उदाहरण द्वारा समझता हूं। इस प्रकार हकीकत में होता है आप इसे मात्र उदाहरण ही मत समझिए बड़े काम की टिप्स है।
जैसे आपके सिलेबस में है भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेता - गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू आदि।
अब पेपर में प्रश्न आता है -
प्र. भारत सेवक समाज की स्थापना किसने की थी ?
(क) फिरोजशाह मेहता
(ख) एनिबिसेंट
(ग) गोपाल कृष्ण गोखले
(घ) राजा राम मोहन राय
अब मान लिजिए की आपको इस प्रश्न का उत्तर नहीं आ रहा है। अब इस प्रश्न के विकल्पों पर नजर डालें। पता चलता है की एनिबिसेंट, फिरोजशाह मेहता और राजा राम मोहन राय तो हमारे सिलेबस में ही नहीं है, तो इसका मतलब हुआ की गोपाल कृष्ण गोखले इस प्रश्न का उत्तर होने की संभावना हो सकती है। और होगा भी यही।
मैं ऐसे नहीं कह रहा हूं की आप इस प्रकार सभी प्रश्नों को हल कर लेंगे। पर यह एक टिप्स है जो इस प्रकार से कोई प्रश्न आ जाए तो हर करने में मददगार साबित होती है।
4. जब आप प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भर देते हैं तो बाजार से बुक खरीदने जाते हैं और आलतू फालतू की  कई सारी मोटी मोटी किताबें ले आते हो और पढ़ने लग जाते हो। आपको किसी अच्छे पब्लिकेशन और लेखक की पुस्तक लेनी है जो सिलेबस कवर करती हो। आजकल बाजार में बहुत पुस्तकें मिलती है जिसमें न जाने कहां कहां की जानकारी ठूंस ठूंस कर भरकर मोटी मोटी किताबें बना देते है।
आपको निर्धारित अध्ययन सामग्री (Prescribed study material) पढ़ना है। इसके साथ साथ विद्यालय और कॉलेज स्तर की जो प्रमाणीक पुस्तकें (Certified books) होती है उनकी सहायता लेनी चाहिए। पाठ्यक्रम में जो टॉपिक होते हैं उन टॉपीकों के निशान इन पुस्तकों में लगा ले और वही पढ़ें।
5. अध्ययन बिंदुओं की आधारभूत जानकारी (Basic Knowledge) या संकल्पना (Concept) का ज्ञान होना जरूरी है। पुस्तक में टॉपिक पर जो शुरुआत में एक पृष्ठ लिखा होता है वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। उससे उस टॉपिक का कांसेप्ट क्लियर हो जाता है और वहीं से अक्सर प्रश्न पूछ लिए जाते हैं।
 मैंने इस व्यूह रचना का अध्ययन किया तो पाया कि टॉपिक का शुरुआती पृष्ठ बहुत महत्वपूर्ण होता है और वहां से प्रश्न भी पूछे गए थे।
6. विगत वर्षों के प्रश्न पत्रों (Solved Paper) को हल करना चाहिए जिससे यह पता चले कि प्रश्न किस प्रकार से पूछे जा सकते हैं और किस तरह से हल किया जा सकता है। प्रश्नों के उत्तर पाठ्यपुस्तक (Text Book) में ढूंढने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि जब आप एक प्रश्न का उत्तर ढूंढोगे तो चार और प्रश्नों के उत्तरों की जानकारी साथ में प्राप्त हो जाएगी और अधिगम भी स्थाई होगा।
 जब आप खोज कर किसी प्रश्न को हल करेंगे तो वह ज्ञान आपका स्थाई होगा।
7. कुछ ऐसे प्रश्न होते हैं जो समझे नहीं जाते हैं। जैसे - आंकड़े, तथ्य, सन् आदि। इनको बार-बार अध्ययन (Revision) से याद रखा जा सकता है या कोई ट्रिक्स बनाई जाकर याद रख सकते हैं या उनका तुलनात्मक अध्ययन करके भी याद रख सकते हैं।
8. अपवाद स्वरूप और पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्नों के पीछे न भागे। यदि इनके पीछे भाग गए तो समय व्यर्थ होगा और अध्ययन सामग्री बढ़ जाएगी। कभी कभार एक या दो प्रश्न ऐसे पूछ लिए जाते हैं। इसे इग्नोर करें।
9. हमेशा गुणवत्तापूर्ण (Quality) अध्ययन सामग्री ही पढ़ें। अपने हाथ से स्वयं नोट्स (Hand Notes) बनाएं। जो जो महत्वपूर्ण जानकारी हो उसे पढ़ते समय नोट करते जाएं ताकि परीक्षा के नजदीक दुबारा एक बार कम समय में महत्वपूर्ण जानकारी को पढ़ा जा सके।
10. मॉडल पेपर (Model Paper) हल करके देखना चाहिए ताकि हमारी तैयारी का आकलन हो सके।
11. नोट्स बनाते समय मानचित्र, डायग्राम और टेबल का प्रयोग करें‌।
12. तुलनात्मक अध्ययन (comparative study) करना चाहिए। जैसे - आपकी पुस्तक में भारत के सभी राज्यों का क्षेत्रफल तो दिया हुआ है पर यह नहीं बताया गया है कि सबसे बड़ा राज्य कौन सा है और सबसे छोटा राज्य कौन सा है और 5 सबसे बड़े राज्य और 5 सबसे छोटे राज्य कौन-कौन से हैं। इस प्रकार के प्रश्नों को तुलनात्मक अध्ययन द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।
13. टॉपिक को सबसे पहले वर्णनात्मक (Descriptive) रूप से पढ़ना चाहिए जिससे सभी जानकारियां क्लीयर हो जाएं। कुछ ऐसे टॉपिक होते है जो वर्णात्मक पढ़ने में रोचक या कहानी जैसे होते हैं। अतः उसे आसानी से याद किया जा सकता है।
 इसके बाद आप शॉर्ट नोट्स, वन लाइनर, बहुविकल्पी प्रश्न (Objective Type Question) पढ़ सकते हैं। जब आप सीधे बहुविकल्पीय या शार्ट प्रश्न पढ़ते हैं तो आपका दिमाग सीधा विकल्पों या उत्तर पर आश्रित रहेगा, जिससे अधिगम नहीं हो पाएगा।

परीक्षा कक्ष में पेपर हल करने की टिप्स

Paper solving tips in exam hall
1. OMR Sheet or Questions Paper पर लिखे निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।
2. OMR Sheet में अपने Roll No. ध्यानपूर्वक भरें।
3. प्रश्न पत्र की समयावधि (Time Period) को ध्यान में रखते हुए हल करें।
4. प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़ते हुए समझने की कोशिश करें की प्रश्न में पूछा क्या गया है। कई बार प्रश्न को एक बार पढ़ने से समझ में नहीं आता है अगर दो-तीन बार पढ़ा जाए तो समझ आ जाता है। प्रश्न पढ़ने और समझने के बाद नजर विकल्पों पर न डालें। विकल्पों को छुपाकर रखें। अब आपके दिमाग में जो उतर है वो विकल्पों में है क्या देखें। अगर नहीं है तो प्रश्न पर दुबारा विचार करें और समझने की कोशिश करें तथा विकल्पों पर भी विचार किया जाए।
5. सही विकल्प का OMR Sheet में अंकन ध्यान पूर्वक करें। कहीं दूसरे प्रश्न में न भरा जाए। अक्सर ऐसी गलती अभ्यर्थी करते हैं।
6. ऋणात्मक अंकन (Negative Marking) से बचने का पूरा प्रयास करें। तुक्का मारकर प्रश्न हल न करें।
7. जिन प्रश्नो के उत्तर आपको एकदम सही सही आते हो वो प्रश्न सबसे पहले करें और अपना स्कोर चैक करें। अगर स्कोर मैरीट (एक अनुमान के मुताबिक) के आस पास आ रहा है तो आगे और प्रश्नों को हल करने की रिश्क नहीं लें। अगर स्कोर ज्यादा डाउन हो तो कुछ और प्रश्नों को हल करने की कोशिश करें।
8. कई बार हिन्दी माध्यम में ऐसे शब्द लिखे होते जो समझ नहीं पाते है। अतः ऐसे शब्दों को अंग्रेजी माध्यम में देखना चाहिए। इस प्रकार प्रश्न को समझने में सहायता मिलती है।
जैसे हिंदी माध्यम प्रश्न में लिखा है 'वैश्विक उष्णता' और अंग्रेजी माध्यम में लिखा है 'Globle Warming' । अब हमारे समझ में आ जाता है की वैश्विक उष्णता किसके लिए आया है। क्योंकि हमने तो ग्लोबल वार्मिंग ही पढ़ा था।
9. कई बार सन वाले प्रश्न पूछे जाते हैं और उनके विकल्प बहुत ही नजदीकी (Closely) होते है। जैसे 1965,1966,1967,1968. इस प्रकार के विकल्पों में जब हमें पूर्ण विश्वास हो की यही होगा तभी करें अन्यथा छोड़ दें।
जब विकल्प दूर दूर हो तो हमें नॉलेज के आधार पर उस प्रश्न को हल कर सकते हैं।
10. अंत में एक बार पूरे पेपर और उतर पत्रक (Answer Sheet) पर नजर डालें की कही कोई प्रश्र छूट तो नहीं गया है। रोल नंबर भी एक बार दुबारा चैक कर लेना चाहिए।
मुझे आशा है की मेरे द्वारा दी गई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे प्राप्त करें की टिप्स से आप जरूर लाभान्वित होंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं में जरूर सफल होंगे।

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