विद्यालय आधारित आकलन (SBA) क्या है ?

विद्यालय आधारित आकलन क्या है ?

What is school based assessment?
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) के क्रियान्वयन में कमियों के कारण उत्पन्न हुई विकृतियों और कमियों को दूर करने के लिए विद्यालय आधारित आकलन (SBA) को अगली पीढ़ी के आकलन के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
 यह एक बार में बाहरी (बोर्ड) परीक्षा बाह्य और आंतरिक परीक्षा के संयोजन, सीसीई और अब एसबीए के रूप में अनुक्रम में चौथा हो सकता है।
विद्यालय आधारित आकलन, School Based Assessment in hindi
School Based Assessment


विद्यालय आधारित आकलन (School Based Assessment)

विद्यालय आधारित आकलन (SBA) शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया के दौरान समग्र रूप से सीखने के प्रतिफलों के संदर्भ में निर्दिष्ट दक्षताओं को प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है। विद्यालय आधारित आकलन 'सीखने के लिए आकलन' की व्यापक प्रक्रिया में निहित है।
विद्यालय आधारित आकलन शिक्षकों को बच्चे की सीखने की प्रगति का निरीक्षण करने, समय पर प्रतिक्रिया देने और बच्चे को सीखने की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करने के लिए सहायता प्रदान करता है। विद्यालय आधारित आकलन (SBA) सूक्ष्म स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी में मदद करता है।
 आकलन इस तरीके से किया जाना चाहिए जिससे शिक्षकों पर बोझ न पड़े और उनके शिक्षण अधिगम को प्रभावित किया जा सके।
 आकलन का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सीखने की जरूरतों को समझने के लिए उन्हें अपनी दक्षता बढ़ाने में सहायता देना है और यदि सीखने में यदि कोई परेशानी है तो उसे दूर करने के लिए उसकी मदद करना है।
विद्यालय आधारित आकलन प्रक्रिया में दक्षताओं के बारे में तर्कपूर्ण आकलन किए बिना और यह जाने बिना कि उनमें से प्रत्येक के पीछे की सीख क्या है। आकलन नहीं किया जा सकता।
विद्यालय आधारित आकलन (School Based Assessment) शिक्षण अधिगम (Teaching-Learning) का अभिन्न अंग है। सीखने के दौरान विषयवस्तु के विभिन्न पहलुओं पर बच्चों को कक्षा के अंदर और बाहर दोनों गतिविधियों में भाग लेने तथा अलग-अलग स्रोतों से जानकारी एकत्रित करने की आवश्यकता होती है। जिसे विद्यालय आधारित आकलन के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है ।
 विद्यालय आधारित आकलन सीखने की प्रक्रिया की योजना, हस्‍तांतरण और आकलन में भागीदार के रूप में शामिल किया गया है और इस प्रकार इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा प्रतिक्रिया देना और प्राप्‍त करना दोनों शामिल हैं।
विद्यालय आधारित आकलन (SBA) मुख्य रूप से इस सिद्धांत पर आधारित है कि बाहरी परिक्षकों की अपेक्षा शिक्षक अपने विद्यार्थियों की क्षमताओं को बेहतर ढंग से जानते हैं। विद्यालय आधारित आकलन एक सतत रूप से चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें शिक्षार्थियों के अधिगम त्रुटियों की पहचान कर उसमें सुधार करने का प्रयास किया जाता है।
 अतः विद्यालय आधारित आकलन (SBA) में शिक्षक अपने शिक्षार्थियों का स्वयं आकलन करता है, इसलिए वह अपने अधिकार क्षेत्र पर प्रभुत्व की भावना भी रखता है। जब शिक्षक में स्वामित्व की भावना आ जाती है तो उसमें स्वयं जिम्मेदार होने की भावना भी स्वत: ही आ जाती है।
 इस प्रकार विद्यालय आधारित आकलन में शिक्षक में स्वामित्व की भावना उत्पन्न होती है और विद्यालय आधारित वातावरण में अधिक सीखने में सभी विद्यार्थियों की मदद करता है। विद्यालय आधारित आकलन रचनात्मक प्रतिपुष्टि प्रदान कराते हुए सीखने में संवर्धन करता है और सभी विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास को निश्चित भी करता है।

विद्यालय आधारित आकलन की मुख्य विशेषताएं

Features of school based assessment
1. शिक्षण-अधिगम और आकलन को एकीकृत करना।
2. इस प्रकार के आकलन में शिक्षको पर प्रलेखन, रिकॉर्डिंग, रिपोर्टिंग आदि का कोई भार नहीं रहता है जैसा कि सीसीई प्रक्रिया में रहता है।
3. यह बाल -केंद्रित और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति है।
4. इस आकलन में विषय वस्तु याद रखने (रटने) के बजाय (सीखने के प्रतिफल आधारित) योग्यता विकास पर ध्यान देना।
5. आकलन के क्षेत्र को स्व-आकलन, सहपाठी के द्वारा आकलन के अलावा शिक्षक द्वारा आकलन के माध्यम से व्यापक बनाना है।
6. शिक्षार्थियों में भय रहित ,तनाव मुक्त और बढ़ी हुई भागीदारी/सहभागिता पर बल।
7. उपलब्धि के आकलन के बजाय सीखने के आकलन पर ध्यान देना।
8. शिक्षक और व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाना।
9. विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाना।

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सिखने के प्रतिफल क्या है ?

What is Learning Outcome?
सिखने के प्रतिफल हमें यह बताते है कि किसी छात्र को किसी कक्षा स्तर के दौरान क्या क्या सिखना जरूरी है। किसी कक्षा स्तर के लिए निर्धारित किए गए अधिगम बिंदुओं को जब छात्र अधिगम कर लें और दैनिक जीवन में उपयोग कर सकें।
पठन सामग्री को रटकर याद करने पर आधारित मूल्यांकन से दूर हटाने के लिए सीखने के प्रतिफल बनाए गए हैं। योग्यता आधारित मूल्यांकन पर जोर देकर शिक्षकों और पूरी व्यवस्था को यह समझने में मदद की गई है कि बच्चे ज्ञान, कौशल और सामाजिक-व्यक्तिगत गुणों और दृष्टिकोण में परिवर्तन के मामले में वर्ष के दौरान एक विशेष कक्षा में क्या हासिल करेंगे।
 सीखने के प्रतिफल ज्ञान और कौशल से परिपूर्ण ऐसे कथन है जिन्हें बच्चों को एक विशेष कक्षा या पाठ्यक्रम के अंत तक प्राप्त करने की आवश्यकता है और यह अधिगम संवर्धन शिक्षण शास्त्र विधियों से समर्थित है जिनका क्रियान्वयन शिक्षकों द्वारा करने की आवश्यकता है।
 ये कथन प्रक्रिया आधारित हैं और समग्र विकास के पैमाने पर बच्चे की प्रगति का आकलन करने के लिए गुणात्मक या मात्रात्मक दोनों तरीके से जांच योग्य बिंदु प्रदान करते हैं।
उदाहरण के लिए -
कक्षा 1 स्तर के छात्रों के हिंदी विषय के सिखने के प्रतिफल
* छात्र द्वारा स्वर और व्यंजन का उच्चारण और लेखन कर सकना।
* सिखे गए वर्णों को संबंधित चित्र से मिलान कर सकना।
कक्षा 2 के स्तर
* छात्र द्वारा स्वरों की मात्रा पहचान सकना।
* दो वर्णों के अक्षरों का उच्चारण एवं लेखन कर सकना।
* जान पहचान के चित्रों के नाम लिख सकता।
कक्षा 3 के स्तर
* छात्र विभिन्न आयु वर्गों के लोगों के लिए और जानवरों और पक्षियों के भोजन की आवश्यकता का वर्णन करता है।
कक्षा 4 संयंत्र के लिए
* विद्यार्थी दैनिक जरूरतों जैसे भोजन, कपड़ा, पानी आदि के उत्पादन और खरीद की प्रक्रिया की व्याख्या करता है।
यही सिखने के प्रतिफल (Learning Outcome) है।
सिखने के प्रतिफल का उद्देश्य होता है कि छात्र ने जो कक्षा कक्ष में सिखा है/ दक्षता/कौशल अर्जित किया है वो क्या उनका दैनिक जीवन में उपयोग कर पा रहा है।

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