खोज प्रशिक्षण प्रतिमान | पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान

खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान

व्यक्ति जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के बारे में जिज्ञासा रखता है। इस जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण व्यक्ति तरह तरह के प्रश्न भी करते रहता है। परंतु उनमें कोई तार्किक क्रमबद्धता नहीं पाई जाती है। अतः व्यक्ति को तार्किक रूप से क्रमबद्ध प्रश्न पूछने का प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।

 रिचर्ड सचमैन जो इस प्रतिमान के प्रवर्तक हैं, उन्होंने सूक्ष्म खोजपरक विचारों / जिज्ञासाओं को व्यवस्थित रूप देने के लिए खोज प्रशिक्षण प्रशिक्षण प्रतिमान का विकास किया। यह प्रतिमान शिक्षण प्रतिमानों के सूचना प्रक्रम प्रतिमानों की श्रेणी में आता है। इस प्रतिमान का विकास भौतिक विज्ञान के शिक्षण हेतु किया गया था।

• खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण की संकल्पनाएं -

1. संपूर्ण ज्ञान अनिश्चित और अस्थाई है।

2. जब व्यक्ति के समक्ष कोई असंगत समस्या होती है तो वह स्वत: ही समस्या का समाधान करने का प्रयास करता है।

3. किसी एक प्रभाव के अनेक कारण होते हैं।

4. समस्या समाधान के लिए सामूहिक प्रयास

5. छात्रों को खोज प्रक्रिया का प्रशिक्षण।

• खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण के उद्देश्य -

1. इस प्रतिमान का मुख्य उद्देश्य छात्रों में खोज की प्रवृत्ति का विकास करना, पूछताछ करना तथा व्यक्तिगत क्षमताओं का विकास करना है।

2. वैज्ञानिक खोज प्रक्रिया से संबंधित कौशलों का विकास करना।

3. सृजनात्मक खोज का विकास करना।

4. व्याख्या कौशल का विकास करना।

5. वैज्ञानिक खोज की नीतियों का विकास करना।

6. समस्या समाधान की प्रवृत्ति का विकास करना।

7. छात्रों के ज्ञानात्मक कौशलों का विकास करना।

• खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण के सोपान -

1. असंगत समस्या का प्रस्तुतीकरण -

 इस सोपान के अंतर्गत शिक्षक छात्रों को खोज प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उनका स्पष्टीकरण छात्रों से करवाता है तथा छात्रों के सामने असंगत समस्या को प्रस्तुत करता है।

 शिक्षक असंगत समस्या या घटना के प्रस्तुतीकरण के लिए शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) का आवश्यकता अनुसार प्रयोग कर सकता है। शिक्षक को इस बात का ध्यान रखना होता है कि समस्या एक ही होनी चाहिए क्योंकि एक से अधिक समस्या होने पर छात्रों में एकाग्रता नहीं रह पाएगी और समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे।

 अतः विद्यार्थी इस सोपान में घटना या समस्या को अच्छी तरह से समझ लेते हैं और असंगतता को पहचान लेते हैं।

2. तथ्यों का एकत्रीकरण और सत्यापन

 इस सोपान में विद्यार्थी संपूर्ण जानकारी शिक्षक के माध्यम से प्रश्न पूछ कर एकत्र की जाती है। प्रश्नों के उत्तर हां या नहीं में ही होने चाहिए, यह जरूरी है। यह कार्य कार्यपत्रक या श्यामपट्ट के माध्यम से भी किया जा सकता है।

3. तथ्यों का एकत्रीकरण और प्रयोगीकरण

 इस सोपान में शिक्षक छात्रों को प्रयोग के माध्यम से तथ्यों को एकत्र करने में सहायता करता है। परिकल्पनाओं का परीक्षण इस सोपान में होता है। परीकल्पनाओं का परीक्षण प्रश्नों के द्वारा या प्रयोगों के द्वारा किया जा सकता है।

4. स्पष्टीकरण का निर्माण

 इस सोपान में छात्र तथ्यों के सत्यापन और प्रयोगीकरण के आधार पर औपचारिक रूप से असंगत घटना या समस्या का प्रस्तुतीकरण करते हैं। अर्थात छात्र सिद्धांतों का निर्माण करते हैं।

5. खोज प्रक्रिया का विश्लेषण - इस सोपान में विद्यार्थी को उनकी खोज प्रक्रिया की विधियों का विश्लेषण करने के लिए कहा जाता है।

• सामाजिक व्यवस्था - इस प्रतिमान में सामाजिक व्यवस्था सहकारिता के सिद्धांत पर आधारित है। यह प्रतिमा ने इस बात पर बल देता है कि वैयक्तिक प्रयासों की तुलना में सामूहिक प्रयास अधिक उत्तम है।

• खोज प्रशिक्षण या पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान में शिक्षक की भूमिका -

1. खोज प्रक्रिया के विषय में जानकारी देना।

2. असंगत समस्या का चयन एवं निर्माण।

3. समस्या के प्रस्तुतीकरण हेतु उपयुक्त माध्यम का चुनाव।

4. असंगत समस्या का प्रस्तुतीकरण।

5. खोज प्रक्रिया में छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर हां या नहीं में देना।

6. स्पष्टीकरण को लिखना।

7. आवश्यकता अनुसार छात्रों को दिशानिर्देश, प्रोत्साहन एवं मदद करना।

• खोज प्रशिक्षण या पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान में विद्यार्थियों की भूमिका -

1. असंगतता की पहचान करना।

2. समस्या से संबंधित प्रश्न पूछना।

3. कार्यपत्रक का प्रयोग करना।

4. तथ्यों का एकत्रीकरण और परिकल्पनाओं का परीक्षण।

5. आवश्यकतानुसार प्रयोग करना, पुस्तकों का अध्ययन करना।

6. स्पष्टीकरण, सामान्यीकरण, नियम का निर्माण करना।

• खोज प्रशिक्षण प्रतिमान का उपयोग -

1. विभिन्न विषयों की समस्यात्मक स्थितियों का समाधान करने में।

2. दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान करने में।

3. वैज्ञानिक विधि एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

• खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण के शिक्षण प्रभाव -

1. वैज्ञानिक प्रक्रिया से संबंधित कौशलों का विकास करना।

2. परिकल्पना निर्माण एवं निष्कर्ष निकालना।

3. छात्रों में सृजनात्मक खोज के लिए व्यूह रचना का विकास करना।

यह भी पढ़ें - शिक्षण प्रतिमानों (Teaching Model) का वर्गीकरण

खोज प्रशिक्षण प्रतिमान | पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान

• खोज प्रशिक्षण / पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान के पोषक प्रभाव -

1. स्वतंत्र खोज की प्रवृत्ति का विकास

2. अस्पष्टता की स्थिति को सहन करने की क्षमता का विकास।

3. ज्ञान के अनिश्चित रूप को समझने की सामर्थ्य का विकास।