शब्द विचार : संज्ञा | हिंदी व्याकरण एवं रचना

संज्ञा की परिभाषा, संज्ञा के भेद एवं उदाहरण

• संज्ञा की परिभाषा -

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, दोष, भाव, अवस्था आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा का रूप परिवर्तन लिंग वचन कारक के अनुरूप होता है।

अथवा

नाम ही संज्ञा है।

• संज्ञा के भेद -

* व्युत्पत्ति / बनावट के आधार पर संज्ञा के तीन भेद हैं -

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा -

 व्यक्तिगत नाम ही व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

अथवा

व्यक्तियों के नाम, देशों के नाम, समुद्रों के नाम, नदियों के नाम, राष्ट्रीय जातियों के नाम (भारतीय, चीनी, जापानी, रूसी), पर्वतों के नाम, नगरों के नाम, लड़कों के नाम, चौकों (squares/ circles) के नाम (जैसे भगतसिंह सर्किल/चौक), पुस्तकों के नाम, समाचार पत्रों के नाम, ऐतिहासिक घटनाओं के नाम, दिनों, महिनों, त्योहारों, उत्सवों, ऋतुओं के नाम आदि व्यक्तिवाचक संज्ञा के अंदर शामिल किए जाते हैं।

2. जातिवाचक संज्ञा -

 समूहगत नाम अथवा वर्गगत अथवा जातिगत नाम को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

अथवा 

संबंधियों के नाम, व्यवसायों के नाम, पदों या कार्यों के नाम, पशुओं के नाम, पक्षियों के नाम, वस्तुओं के नाम, प्राकृतिक तत्वों के नाम आदि जातिवाचक संज्ञा में शामिल किए जाते हैं।

3. भाववाचक संज्ञा - भावगत नाम ही भाववाचक संज्ञा है।

 अथवा

गुण,धर्म, विचार, भाव, दोष, स्वभाव, दशा, चेष्टा आदि नामों को भाववाचक संज्ञा में शामिल किया जाता है।

नोट - इस संज्ञा का ज्ञान इंद्रियों से नहीं मन से होता है। भाववाचक संज्ञा को हम आंखों से प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं सकते हैं। मन के द्वारा अहसास किया जाता है। अतः भाववाचक संज्ञा हार्डवेयर न होकर सोफ्टवेयर रूप में होती है।

भाववाचक संज्ञा के उदाहरण - खट्टा, मीठा, चालाकी, समझदारी, समाजवाद, चोरी, चिकनाहट, कड़वाहट, जवानी, नारीत्व, सुंदरता, समझ, कोमलता, लिखाई, लिखावट, लड़कपन, मित्रता, बचपन, बुढ़ापा, डकैती, वकालत, बपौती, मातृत्व, अपनापन, अहंकार, निजत्व, स्वत्व, वीरता, सफेदी, चतुराई, बड़प्पन, ठंडक, हरियाली, कठिनाई, एकता, पढ़ाई, चाल, दौड़, घबराहट, हंसी आदि भाववाचक संज्ञा के उदाहरण है।

भाववाचक संज्ञा पन, आई, आस, त्व, ई, वाद, आहट, ता आदि प्रत्ययों से बनती है।

• संज्ञा के दो अन्य भेद -

1. द्रव्यवाचक या पदार्थवाचक संज्ञा - जैसे - ऊन, सोना, चांदी, लोहा, पारा, तेजाब, पेट्रोल, घी, वायु, जल, दूध आदि। इस संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत शामिल किया जाता है।

2. समूहवाचक संज्ञा - संज्ञा जो किसी समुदाय को बताए। जैसे - सेना, कक्षा, दल, झुंड, मंडली, टोली, गिरोह, परिवार, भीड़, कुटुंब, जत्था, समिति, कुंज आदि। यह संज्ञा भी जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत आती हैं।

• कई बार संज्ञाएं आपस में बदल जाती हैं। आइए कुछ उदाहरणों के माध्यम से अभ्यास करते हैं -

* भारत में जयचंदों की कमी नहीं है। वाक्य मेंं रेखांकित शब्द जयचंदों में जातिवाचक संज्ञा है जो की व्यक्तिवाचक से जातिवाचक बनी है। जयचंदों शब्द जयचंद से बना है। जयचंद में व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

* यशोदा हमारे घर की लक्ष्मी है। वाक्य में यशोदा को लक्ष्मी बताया गया है। यशोदा व्यक्तिवाचक संज्ञा है जबकि लक्ष्मी जातिवाचक संज्ञा है। इस प्रकार यहां व्यक्तिवाचक से जातिवाचक संज्ञा बनी है।

* राममूर्ति कलयुग के भीम थे। वाक्य में राममूर्ति को भीम बताया गया है। राममूर्ति में व्यक्तिवाचक संज्ञा है जबकि भीम शब्द में जातिवाचक संज्ञा है। इस प्रकार यहां व्यक्तिवाचक से जातिवाचक संज्ञा बनी है।

* बड़ों का आदर करो। वाक्य में रेखांकित शब्द बड़ों में जातिवाचक संज्ञा है। बड़ा शब्द विशेषण है परंतु अब यहां पर इसका प्रयोग संज्ञा के रूप में हुआ है।

* भारत में गंगा नदी को पवित्र माना जाता है। वाक्य में रेखांकित शब्दों में संज्ञा है। गंगा में व्यक्तिवाचक संज्ञा है जबकि नदी में जातिवाचक संज्ञा है।

* राम ने रावण को बाण से मारा। वाक्य में रेखांकित शब्दों में संज्ञा है। राम - व्यक्तिवाचक संज्ञा, रावण - व्यक्तिवाचक संज्ञा, बाण - जातिवाचक संज्ञा।

* सुंदर शब्द में कौन सी संज्ञा है। सुंदर शब्द संज्ञा शब्द नहीं है। परंतु यह विशेषण शब्द है। सुंदरता शब्द संज्ञा शब्द है जिसमे भाववाचक संज्ञा है।

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* निम्न शब्दों में कौन सी संज्ञा है -

मिठाई -  जातिवाचक संज्ञा

मीठा -  संज्ञा नहीं विशेषण है

मिठास - भाववाचक संज्ञा

मिठाराम -  व्यक्तिवाचक संज्ञा

मिठापन -  भाववाचक संज्ञा