ज्ञानात्मक एवं भावात्मक उद्देश्यों के लिए कार्यसूचक क्रियाएं

• उद्देश्यों का विशिष्टीकरण (Specification of Objectives)

उद्देश्यों को शिक्षण के उपरांत विद्यार्थी द्वारा उस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु दर्शाए जाने वाले व्यवहारगत परिवर्तन के रूप में लिखा जाना ही उद्देश्यों का विशिष्टीकरण कहलाता है। उद्देश्यों को विशिष्ट रूप में लिखने के लिए क्रियासूचक क्रियाओं के प्रयोग की आवश्यकता होती है।

 रॉबर्ट मेगर ने ज्ञानात्मक एवं भावात्मक पक्ष के उद्देश्यों को व्यवहारिक क्रम में लिखने की रूपरेखा तैयार की। रॉबर्ट मिलर ने क्रियात्मक पक्ष के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लिखने की योजना प्रस्तुत की।

रॉबर्ट मेगर उद्देश्यों को व्यवहारिक रूप में लिखने के लिए ब्लूम के वर्गीकरण को आधार बनाया है। प्रत्येक स्तर के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लिखने के लिए कार्यसूचक क्रियाएं निश्चित की गई है जिसका प्रयोग करके उद्देश्यों को विशिष्ट रूप में व्यावहारिक रूप में लिख सकते हैं।

• ज्ञानात्मक उद्देश्य के लिए कार्य सूचक क्रियाएं

1. ज्ञान (Knowledge)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. प्रत्यास्मरण करना        2. प्रत्यभिज्ञान करना

3. सूची देना                    4. कथन देना

5. परिभाषा देना               6. लिखना

2. अवबोध (Comprehension)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. उदाहरण देना              2. वर्गीकरण करना

3. तुलना करना                4. अंतर करना

5. गणना करना                6. व्याख्या करना

7. अनुवाद करना              8. अर्थापन करना

3. अनुप्रयोग (Application)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. जांच करना                    2. उपयोग करना

3. भविष्य कथन करना         4. निष्कर्ष निकालना

5. गणना करना                    6. उल्लेख करना

7. संबंध स्थापित करना          8. समाधान करना

4. विश्लेषण (Analysis)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. विश्लेषण करना               2. निष्कर्ष करना

3. भेद करना                       4. अलग निकालना

5. विभाजन करना                6. आलोचना करना

7. पुष्टि करना                       8. उल्लेख करना

5. संश्लेषण (Synthesis)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. सामान्यीकरण करना           2. संक्षिप्त करना

3. व्यवस्थित करना                 4. निष्कर्ष निकालना

5. पुनः कथन देना                   6. पुनः व्यवस्थित करना

7. निर्मित करना                      8. तर्क करना

9. योजना बनाना

6. मूल्यांकन (Evaluation)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

1. आलोचना करना          2. मूल्यांकन करना

3. वर्णन करना                4. पुष्टि करना

5. निर्णय लेना                 6. पक्ष करना

• भावात्मक उद्देश्य के लिए कार्य सूचक क्रियाएं

1. अधिग्रहण (Receiving)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• ध्यान देना, पूछना, आग्रह करना, प्रत्यक्षीकरण, चयन करना, नाम देना, सावधान होना, पहचानना, पक्ष लेना, लिखना।

2. अनुक्रिया (Responding)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• उत्तर देना, आज्ञा पालन, पूरा करना, अभ्यास करना, कथन करना, लिखना, वाद विवाद करना, प्रस्तुत करना।

3. मूल्य आंकना (Valuing)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• स्वीकार करना, निश्चय करना, विभेद करना, क्रम निर्धारित करना, विकास करना वृद्धि करना।

4. मूल्यों का संधारण (Conceptualization)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• संबंधित करना, पूरा करना, सह-संबंध स्थापित करना, तुलना करना, सामान्यीकरण करना, तैयार करना, बनाना।

5. व्यवस्थापन (Organization)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• निर्णय करना, संश्लेषित करना, व्यवस्थित करना, संबंधित करना, संबंध स्थापित करना, निर्णय करना।

6. चरित्रीकरण (Characterization)

कार्य सूचक क्रियाएं (Action Verb)

• स्वीकार करना, चरित्रीकरण, सेवा करना, हल करना, दोहराना, सामना करना, पुष्टि करना, प्रदर्शित करना।

उद्देश्यों के विशिष्टीकरण में किसी विषय वस्तु के लिए निर्धारित उद्देश्य के अनुसार कार्य सूचक क्रियाओं का चुनाव किया जाता है। कार्य सूचक क्रियाओं को विषय वस्तु के साथ जोड़कर उद्देश्य को व्यवहार परिवर्तन के रूप में लिखा जाता है। कुछ उदाहरणों की सहायता से इसे समझा जा सकता है।

• विज्ञान विषय के ज्ञानात्मक उद्देश्यों के लिए व्यवहारगत परिवर्तन

प्रकरण - भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

1. ज्ञान - विद्यार्थी भौतिक और रासायनिक परिवर्तन का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।

2. अवबोध - विद्यार्थी भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में अंतर कर सकेंगे।

3. अनुप्रयोग - विद्यार्थी नवीन परिस्थितियों में होने वाले परिवर्तनों को वर्गीकृत कर सकेंगे।

4. कौशल - विद्यार्थी भौतिक और रासायनिक परिवर्तन को दर्शाने वाले प्रयोग कुशलतापूर्वक कर सकेंगे।

5. अभिरुचि - विद्यार्थी अपने चारों और घटित होने वाले परिवर्तनों की प्रकृति को जानने में रुचि लेंगे।

6. अभिवृत्ति - विद्यार्थी में दैनिक जीवन में घटित होने वाले विभिन्न परिवर्तनों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा।

• नागरिक शास्त्र विषय के ज्ञानात्मक उद्देश्यों के लिए व्यवहारगत परिवर्तन

प्रकरण - स्वतंत्रता और समानता

1. ज्ञान - विद्यार्थी स्वतंत्रता और समानता का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी स्वतंत्रता और समानता का प्रत्यभिज्ञान कर सकेंगे।

2. अवबोध - विद्यार्थी स्वतंत्रता और समानता में भेद कर सकेंगे। विद्यार्थी स्वतंत्रता और समानता के उदाहरण दे सकेंगे।

3. अनुप्रयोग - विद्यार्थी स्वतंत्रता और समानता संबंधी ज्ञान का दैनिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।

4. कौशल - विद्यार्थी में स्वतंत्रता और समानता के चित्र बनाने का कौशल विकसित होगा।

5. अभिरुचि - स्वतंत्रता और समानता को बनाए रखने और सरंक्षण में रुचि लेंगे।

6. अभिवृत्ति - विद्यार्थियों में स्वतंत्रता और समानता के सरंक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

• हिंदी विषय के ज्ञानात्मक उद्देश्यों के लिए व्यवहारगत परिवर्तन

प्रकरण - विशेषण

1. ज्ञान - विद्यार्थी विशेषण को परिभाषित कर सकेंगे तथा संज्ञा शब्दों का प्रत्यभिज्ञान कर सकेंगे।

2. अवबोध - विद्यार्थी विशेषण के उदाहरण दे सकेंगे तथा संज्ञा के प्रकारों में अंतर कर सकेंगे।

3. अनुप्रयोग - विद्यार्थी नवीन परिस्थिति में विशेषण शब्दों के उदाहरण दे सकेंगे।

4. कौशल - विद्यार्थी विशेषण के प्रकारों को चित्रात्मक रूप में दर्शा सकेंगे।

5. अभिरुचि - विद्यार्थी विशेषण शब्दों को जानने में रुचि लेंगे।

• गणित विषय के ज्ञानात्मक उद्देश्यों के लिए व्यवहारगत परिवर्तन

प्रकरण - वर्ग का क्षेत्रफल

1. ज्ञान - विद्यार्थी वर्ग का क्षेत्रफल निकालने संबंधित सूत्र का प्रत्यास्मरण कर सकेंगें।

2. अवबोध - विद्यार्थी वर्ग का क्षेत्रफल निकालने संबंधित सूत्र की अपने शब्दों में व्याख्या करते हैं।

3. अनुप्रयोग - विद्यार्थी नवीन परिस्थिति में दिए गए वर्ग के क्षेत्रफल की गणना कर सकेंगे।

4. कौशल - विद्यार्थी लंबाई तथा चौड़ाई ज्ञात होने पर विभिन्न क्षेत्रफल के वर्ग का चित्र बना सकेंगे।

5. अभिरुचि - विद्यार्थी दैनिक जीवन में विभिन्न वर्गाकार वस्तुओं का क्षेत्रफल निकालने में रुचि लेंगे।

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