इसरो के सहयोग से नीति आयोग ने भारत का भू-स्थानिक ऊर्जा मानचित्र लॉन्च किया

• नीति आयोग ने भारत का भू-स्थानिक ऊर्जा मानचित्र (Geo-spatial Energy Map) लॉन्च किया

नीति आयोग के Vice President डॉ. राजीव कुमार, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के सारस्वत और नीति आयोग के CEO श्री अमिताभ कांत ने 18 October 2021 को भारत का भू-स्थानिक ऊर्जा मानचित्र (Geo-spatial Energy Map) लॉन्च किया।

इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के सहयोग से नीति आयोग (NITI Aayog) ने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के ऊर्जा मंत्रालयों के साथ भारत का एक विस्तृत भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) एनर्जी मैप विकसित किया है। यह GIS Map देश के सभी ऊर्जा संसाधनों की एक संपूर्ण तस्वीर प्रदर्शित करता है जो पारंपरिक बिजली संयंत्रों, तेल और गैस के कुओं, पेट्रोलियम रिफाइनरियों, कोयला क्षेत्रों और कोयला ब्लॉकों जैसे ऊर्जा प्रतिष्ठानों का चित्रण करता है। 27 विषयगत श्रेणियों के माध्यम से अक्षय ऊर्जा बिजली संयंत्रों और अक्षय ऊर्जा संसाधन क्षमता आदि पर District Wise डेटा प्रस्तुत करता है।

यह मानचित्र देश में ऊर्जा के उत्पादन और वितरण का एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए ऊर्जा के सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों और उनके परिवहन या प्रेषण नेटवर्क की पहचान करने तथा उनकी खोज करने का प्रयास करता है। यह एक अनूठा प्रयास है जिसका मकसद कई संगठनों में बिखरे हुए ऊर्जा आंकड़ों को एकीकृत करना और इसे समेकित, आकर्षक चित्रात्मक रूप से प्रस्तुत करना है।

इसमें Web-GIS Technology और Open-Source Software में नवीनतम प्रगति का लाभ उठाया गया है ताकि इसे प्रभावी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जा सके।

भारत का Geospatial Energy Map योजना बनाने और निवेश संबंधी निर्णय लेने में इस्तेमाल होगा। यह उपलब्ध ऊर्जा परिसंपत्तियों का उपयोग करके आपदा प्रबंधन में भी सहयोग करेगा।

नीति आयोग के Vice President डॉ. राजीव कुमार ने भारत के GIS-Based एनर्जी मैप का लोकार्पण करते हुए कहा कि ऊर्जा परिसंपत्तियों का GIS-Mapping भारत के ऊर्जा क्षेत्र के वास्तविक समय (रियल टाइम) और एकीकृत योजना को सुनिश्चित करने के लिए उपयोगी होगा। इसके बड़े भौगोलिक विस्तार और परस्पर निर्भरता को देखते हुए, ऊर्जा बाजारों में दक्षता हासिल करने की अपार संभावनाएं हैं। आगे चलकर, GIS-Based ऊर्जा परिसंपत्तियों की मैपिंग सभी संबंधित हितधारकों के लिए फायदेमंद होगी और नीति-निर्माण प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेगी। इसमें बिखरे हुए आंकड़ों को एकीकृत किया गया है। यह एक बहुत बड़ा शोध उपकरण होगा।

भारत के GIS Based Energy Map को आप यहां देख सकते हैं - भारत का भू-स्थानिक ऊर्जा मानचित्र

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