हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल : सूफी काव्य (प्रेमाख्यान काव्य)

सूफी काव्य (प्रेमाख्यान काव्य) : सूफी कवियों ने हिंदूओं की भाषा में हिंदू प्रेम कथाएं प्रस्तुत की जिसे सूफी या प्रेमाख्यान काव्य कहा जाता है।

सूफी काव्य (प्रेमाख्यान काव्य) : सूफी कवियों ने हिंदूओं की भाषा में हिंदू प्रेम कथाएं प्रस्तुत की जिसे सूफी या प्रेमाख्यान काव्य कहा जाता है।

सूफी काव्य की प्रमुख विशेषताएं

1. इन काव्यों पर सूफी दर्शन का प्रभाव है।

2. इस काव्य में प्रेम पर अधिक बल दिया गया है। इस काव्य में इश्क मजाजी से इश्क हकिमी की ओर बात कही गई है। (इश्क मजाजी - माननीय प्रेम) (इश्क हकीमी - दैविक प्रेम) 

3. इन काव्य में काव्य रूढ़ियां प्राप्त होती है। 

4. इस काव्य में रहस्यवादी भावनाएं भी मिलती है। इन काव्यों की विरह वेदना मार्मिक है। 

5. इन काव्यों में हिंदू घरानों की कथाएं वर्णित है। 

6. यह समासोक्ति काव्य है और श्रृंगार रस का वर्णन है। पहले इन्हें मसनवी काव्य शैली माना गया बाद में इसे भारतीय कथा परंपरा का काव्य माना गया।

शिल्प पक्ष - इन काव्य की भाषा अवधि है। छंद -दोहा, सोरठा, चौपाई। अलंकार - रूपक, उत्प्रेक्षा, विरोधाभास, उपमा। 

प्रमुख सूफी काव्य (प्रेमाख्यान काव्य)

1. चंदायन या लोरकहा - मुल्ला दाउद

2. मृगावती- कुतुबन 

3. मधुमालती - मंझन

4. सत्यवती कथा - ईसरदास (अवधी की सबसे पुरानी रचना)

5. मलिक मोहम्मद जायसी - भक्ति काल की सूफी काव्यधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। जायसी की भाषा ठेठ अवधि है। जायसी जायस के रहने वाले थे और सिकंदर लोदी व बाबर के समकालीन थे। जायसी एकेश्वरवादी होकर भी अद्वैतवादियों की तरह आत्मा और परमात्मा में कोई भेद नहीं मानते थे। जायसी का विरह वर्णन तो विशेषकर नागमती का हिंदी साहित्य की अद्वितीय वस्तु है। जायसी का अमेठी राजघराने में बहुत मान था। सूफी काव्य के प्रतिनिधि कवि 'जायसी' है।

काव्य रचना - १. पद्मावत - यह महाकाव्य सूफी या प्रेमाख्यानक काव्य परंपरा का सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय ग्रंथ है। जायसी की प्रसिद्धि का आधार यही पद्मावत ही है।पद्मावत में रानी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रतन सिंह की प्रेम कथा के माध्यम से कवि ने सूफी मत और भारतीय साधना-पद्धति का सुखद सांमजस्य प्रस्तुत किया है। 

पद्मावत प्रेम प्रधान काव्य है। इसमें इतिहास और कल्पना का तुल्य योग है। जायसी प्रेम के दीवाने थे। पद्मावत श्रृंगार रस प्रधान काव्य है। इसमें वियोग को गहन भूमिका पर प्रस्तुत किया है। भाषा में तद्भव शब्दों का बाहुल्य है। 

जायसी ने मुख्यतः दोहा, चौपाई छंद में ही अपने काव्य की सर्जना की है। डॉ. शंभूनाथ सिंह ने इस छंद पद्धति को 'कड़वक बद्ध' छंद पद्धति कहा है।

२. आखिरी कलाम - बाबर के समय में लिखी गई फारसी अक्षरों में छपी मिली है। इसमें बाबर बादशाह की प्रशंसा है।

३. अखरावट

6 . हंसावली - असाईत

7. लखन सेन पद्मावती की कथा - दामोदर 

8 . माधवानल काम कंदला - गणपति 

9. चित्रावली - उसमान

10. चंद्रकुंवर की बात - हंस 

11. ज्ञानदीप - शेखनबी

12. ग्रंथ लैला मजनूं* -जानकवि

13. इंद्रावती -नूर मोहम्मद

14. अनुराग बांसुरी* - नूर मोहम्मद

15. यूसुफ जुलेखां* - शेख निसार

* इन ग्रंथों में इस्लाम धर्म की बात की गई है।

My name is Mahendra Kumar and I do teaching work. I am interested in studying and teaching competitive exams. My qualification is B.A., B.Ed., M.A. (Pol.Sc.), M.A. (Hindi).

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