मानसिक रूप से विकलांग बालक | मानसिक विकलांगता

इस आर्टिकल में मानसिक रूप से विकलांग बालक क्या है, मानसिक मंदता परिभाषाएँ, मानसिक पिछड़ापन के कारण, मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की विशेषताएं और मानसिक रूप से पिछड़े बालक की समस्याएं आदि टॉपिक पर चर्चा की गई है।

मानसिक विकलांगता क्या है

कुछ बालक अपना कुछ भी कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पाते। ऐसे बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा अपना कार्य दूसरों की सहायता से करते हैं। ये बालक मानसिक रूप से इतने कमजोर होते हैं कि किसी के द्वारा दिए गए निर्देश या आदेश को आसानी से नहीं समझ सकते और ना ही परिवार के अतिरिक्त किसी व्यक्ति से समायोजन (Adjustment) कर पाते।

टरमन (Terman) के अनुसार, “70 से कम बुद्धि लब्धि वाले मानसिक रूप से विकलांग बालक कहलाते हैं।”

मानसिक विकलांगता (Mentally Disabled) को मानसिक पिछड़ापन (Mentally Retardation) भी कह सकते हैं। मानसिक पिछड़ापन व्यक्ति की मानसिक स्थिति को दर्शाता है। सामान्य बालक एवं मानसिक रूप से विकलांग बालकों के तुलनात्मक अध्ययन से ज्ञात हो सकता है कि दोनों की अभिक्षमता में कितना अंतर है।

मानसिक मंदता की परिभाषाएँ

रोजेन, फॉक्स एवं ग्रेगरी ने मानसिक विकलांगता के विषय में लिखा है, “मानसिक पिछड़ेपन से तात्पर्य जन्म या प्रारंभिक बाल्यावस्था की स्थिति है जिसमें प्रमापीकृत बौद्धिक प्रकार्यात्मकता मे निर्योग्यता का पता प्रमापीकृत परीक्षण के द्वारा चलता है। इसके साथ ही व्यक्ति के सामाजिक वातावरण की विभिन्न मांगों के प्रति बाधित अनुकुलित व्यवहार भी देखने को मिलता है।”

ब्रिटिश मेंटल डिफिशिएंसी एक्ट के अनुसार मानसिक मंदता क्या है, “मानसिक पिछड़ापन 18 वर्ष से पूर्व की अवस्था में अपूर्ण एवं बाधित मस्तिष्क के विकास की अवस्था है जो अनुवांशिक कारण अथवा किसी बीमारी या दुर्घटना से उत्पन्न होती है।”

मानसिक पिछड़ापन के कारण

मानसिक पिछड़ापन क्यों होता है ? किस कारण से एक सामान्य बालक भी इस श्रेणी में आता है ? मानसिक हीनता का कारण गर्भकाल भी हो सकता है और वातावरणजनित भी। इसी की चर्चा आगे की जा रही है :

डैवन पोर्ट (Davenport) ने मानसिक पिछड़ापन हेतु निम्न 7 कारणों का उल्लेख किया है :

  1. गुण सूत्रों में विकृति के कारण
  2. अंडाणु के निषेचन के समय उत्पन्न दोष
  3. रोपण से संबंधित दोष
  4. भ्रूणावस्था के समय उत्पन्न दोष
  5. भ्रूण के पाए जाने वाले दोष
  6. प्रसवकालीन आधातों से संबंधित दोष
  7. शैशव एवं बाल्यावस्था में आघात

किर्क (Kirk) ने इसे तीन भागों में विभक्त किया है :

  1. जैविक
  2. अनुवांशिक
  3. सांस्कृतिक

विद्वानों एवं प्रत्यक्ष कारणों को दृष्टि रखते हुए मानसिक मंदता के दो कारण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं :

(1) अनुवांशिकी कारण (Heredity Causes) : मानसिक पिछड़ापन का सर्वप्रथम कारण वंशानुक्रम या आनुवंशिक है जो उनके परिवार से विकृत गुण सूत्रों से प्राप्त होते हैं।

माता-पिता यदि मानसिक रोग या मंदता के हैं तो बालकों में यह गुण अवश्य आते हैं। किंतु यह गुण एक अभिभावक के सभी बालकों में हो यह भी आवश्यक नहीं और ना ही पूर्ण गुण आते हैं।

गुणसूत्रों (Chromosomes) में भिन्नता रहती है । जैसे – यदि अभिभावक 80% मानसिक पिछड़े हैं तो बालकों में यह 60-20% तक ही रह सकता है।

वातावरण जनित कारण व्यक्ति के जीवन के प्रत्येक क्षण में वातावरण अपना प्रभाव दिखाता है। जो व्यक्ति पागल ना हो तो भी वातावरण उसे पागल कर देता है। वातावरण के विभिन्न रूप हो सकते हैं :

  • बालकों में होने वाले रोगों की उचित ढंग से देखभाल ना होने के कारण भी मानसिक मंदता को उत्पन्न कर देती है।
  • मस्तिष्क बुखार, मोतीझरा, एनसिफलाजाइटिस, लकवा आदि रोगों से मानसिक पिछड़ापन होने की संभावना रहती है।
  • महिलाओं का कम उम्र में मां बनना संतान को मस्तिक रुग्णता की ओर ले जाता है।
  • तामसी भोजन (शराब, मांस) की अधिकता भी बालक को मानसिक मंदता उत्पन्न करते हैं।
  • बालक या बालिका द्वारा संवेगों (Emotions) पर नियंत्रण न होना भी मानसिक संतुलन (Mentally Adjustment) बिगाड़ता है।
  • परिवार के द्वारा व्यवहार में भेदभाव मस्तिष्क में विप्लव उत्पन्न करता है।
  • सामाजिक पिछड़ापन मंदबुद्धि का कारण हो सकता है।
  • आर्थिक भिन्नता बालकों में हीनता उत्पन्न करती है जो मानसिक हीनता की और अग्रसर होती है।
  • मानसिक कुंठा के द्वारा भी शनैः-शनै बालक मानसिक रुग्णता को प्राप्त करता है।
  • अधिक शोर या परिवार के सदस्यों की अधिकता भी मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है।
  • मानसिक असामान्यता को प्रतिकूल वातावरण ही उत्पन्न करता है।

मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की विशेषताएं

मानसिक दृष्टि से विकलांग बालकों की विशेषताएं जानने के लिए हमें प्रथम रूप से इन बालकों की पहचान करनी चाहिए कि वे बालक मानसिक दृष्टि से अन्य बालकों से किस प्रकार भिन्न है ? स्किनर ने मंद बुद्धि वाले बालकों की विशेषताएं निम्न प्रकार बताई है :

  • अधिगम सामग्री (Learning Material) के नवीन परिस्थिति में उपयोग करने में कठिनाई
  • परिस्थितियों की परवाह किए बिना निर्णय करना।

  • स्वयं के प्रति चिंतित रहना

  • कार्य-कारण के संबंध में स्पष्ट धारणा न बना सकना
  • व्यक्तियों और घटनाओं के प्रति विशिष्ट प्रतिक्रियाएं

फ्रेंडसन ने मानसिक मंदता वाले बालकों की पहचान हेतु लिखा है :

  • आत्मविश्वास की कमी
  • बुद्धि लब्धि (Intelligence Quotient) का 50-75 के मध्य होना
  • संवेगात्मक (Emotional) स्थिरता एवं भावावेशपूर्ण व्यवहार।

फ्रेंडसन एवं स्किनर आदि मनोवैज्ञानिकों एवं भारतीय समाज विचारकों के आधार पर असामान्य बालकों की निम्न विशेषताएं परिलक्षित होती है :

  • मानसिक मंदता के शिकार बालकों में सीखने की गति धीमी होती है।
  • ऐसे बालक प्रायः अमूर्त या मूर्त चिंतन नहीं कर सकते।
  • अधिगम न के बराबर होता है।
  • बुद्धि लब्धि 50 से 75 के मध्य ही रहती है।
  • मानसिक पिछड़े बालकों मे स्मरण शक्ति की न्यूनता पाई जाती है।
  • संवेगात्मक अस्थिरता रहती है।
  • सामान्य बालकों की अपेक्षा 2 से 7 वर्ष पिछे होते हैं।
  • सामाजिकता का अभाव रहता है।
  • अभिरुचि एवं अभिक्षमता में कमी रहती है।
  • मानसिक अस्वस्थता के कारण शारीरिक ढाँचे मे विकृति आ जाती है।
  • शारीरिक क्रियाएँ करने में प्रमाद रहता है अर्थात ऐसे बालक अपने शरीर के द्वारा की जाने वाली क्रियाएं धिमी गति से करते हैं।
  • प्रायः शरीर अस्वस्थ रहता है।
  • ऐसे बालक प्रायः अपूर्ण शब्दों का उच्चारण करते हैं।
  • मानसिक रूप से पिछड़े बालकों में मौलिकता का अभाव रहता है।
  • मानसिक हीन बालक परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर रहते हैं।

मानसिक रूप से पिछड़े बालक की समस्याएं

परिवार एवं समाज का अंग होने के कारण बालक स्वयं को, परिवार को या समाज को एक सीमित विचारों एवं परंपराओं में रहना पड़ता है।

मानसिक मंदता युक्त बालक जिसे वह होश नहीं कि वह क्या कर रहा है उसके लिए समाज में रहना तो समस्या ही है साथ ही उसके परिवार वालों को अधिक समस्या होती है। कुछ समस्या निम्न प्रकार है :

(1) स्वीकारोक्ति (Confession)

मानसिक मंदता से ग्रस्त बालकों की सर्वप्रथम समस्या होती है मंदबुद्धि मानने की। परिवार का कोई भी सदस्य उसे मंदबुद्धि का नहीं मानता। यदि बालक की बुद्धि लब्धि 70-75 के मध्य है अर्थात उस बालक की बुद्धि अधिक-कम नहीं है वह बालक भी स्वयं को मानसिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ हुआ नहीं मानेगा।

अतः मानसिक पिछड़े बालकों को मंदबुद्धि का मानने के लिए स्वीकारोक्ति की आवश्यकता होनी चाहिए जिससे कोई उपाय किया जा सके।

(2) समायोजन (Adjustment)

मंद बुद्धि वाले मानसिक विकलांग बालकों के समायोजन में प्रायः समस्या रहती है। वैसे तो परिवार मंद बुद्धि वाले सदस्य की पूर्ण देखभाल करते हैं। समायोजन के संदर्भ में निम्न तथ्य मानसिक मंदता के बालकों की समस्या प्रकट करते हैं :

  • परिवार में माता-पिता उस असामान्य बालक को पूर्ण सहयोग देते हैं किंतु परिवार के अन्य सदस्य इस बालक को ‘केवल ढो रहे’ होते हैं।
  • मंदबुद्धि बालक अपनी क्षमता अनुसार अध्ययन का कार्य करता है किंतु माता-पिता अपनी महत्वाकांक्षा के कारण उसे और मानसिकता ताड़ना देते हैं जो अनुचित है।
  • मानसिक विकलांग बालक को कई अवसरों पर परिवार वाले उसे अनदेखी कर जाते हैं।
  • परिवार के अन्य सदस्यों की अपेक्षा उस बालक को कम महत्व देना।
  • आस-पड़ोस का उस मानसिक मंदता युक्त बालक के साथ असहयोगात्मक व्यवहार।
  • समाज के व्यक्तियों द्वारा मंदबुद्धि बालकों को हीन दृष्टि से देखना। समाज व आस पड़ोस के व्यक्ति अपने बालकों को उस बालक के साथ न खेलने देना।
  • विद्यालय में शिक्षक एवं प्रधानाचार्य द्वारा बालक की पूर्ण देखभाल न होना।
  • विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा उसे अलग श्रेणी का मानना।

(3) वातावरण (Environment)

मंदबुद्धि (Mentally Retarded) बालकों को यदि अनुकूल वातावरण मिल जाए तो अधिकतर बालक मानसिक स्वस्थता प्राप्त कर लें तथा मानसिक विकलांग बालकों में अपेक्षित सुधार आ जाए। मानवीय स्वभाव ऐसा है जिसमें उसे किसी बात का बार-बार जिक्र किया जाए तो वह उसे सत्य मान लेता है।

ऐसा अनेक बार प्रत्यक्ष रूप से देखा गया है कि एक सामान्य बालक के लिए किसी ने ऐसा वातावरण बना दिया कि उसके सामने उसे मंदबुद्धि कहलवाया जा रहा है तो कुछ समय बाद उसे स्वतः ऐसा लगने लगेगा कि वास्तव में मंद है और वह मानसिक मंदता की श्रेणी में आ जाता है। अतः ऐसे बालकों के लिए विषम वातावरण भी समस्या का कारण है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. मानसिक रूप से विकलांग बच्चे कौन होते हैं?

    उत्तर : कुछ बालक अपना कुछ भी कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पाते। ऐसे बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा अपना कार्य दूसरों की सहायता से करते हैं। ये बालक मानसिक रूप से इतने कमजोर होते हैं कि किसी के द्वारा दिए गए निर्देश या आदेश को आसानी से नहीं समझ सकते और ना ही परिवार के अतिरिक्त किसी व्यक्ति से समायोजन (Adjustment) कर पाते।

  2. आप मानसिक रूप से मंद बच्चे की पहचान कैसे करेंगे?

    उत्तर: मानसिक रूप से मंद बालकों में सीखने की गति धीमी होती है। ऐसे बालक प्रायः अमूर्त या मूर्त चिंतन नहीं कर सकते। अधिगम न के बराबर होता है। बुद्धि लब्धि 50 से 75 के मध्य ही रहती है। स्मरण शक्ति की न्यूनता पाई जाती है। संवेगात्मक अस्थिरता रहती है। सामान्य बालकों की अपेक्षा 2 से 7 वर्ष पिछे होते हैं। सामाजिकता का अभाव रहता है।

  3. मानसिक रूप से विकलांग बालकों की बुद्धि लब्धि कितनी होती है?

    उत्तर : टरमन (Terman) के अनुसार, “70 से कम बुद्धि लब्धि वाले मानसिक रूप से विकलांग बालक कहलाते हैं।”

My name is Mahendra Kumar and I do teaching work. I am interested in studying and teaching competitive exams. My qualification is B.A., B.Ed., M.A. (Pol.Sc.), M.A. (Hindi).

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