रासो काव्य : हिन्दी साहित्य का आदिकाल

रासो काव्य हिंदी का अति विशिष्ट काव्य है। यह राजाओं का प्रशस्ति परक काव्य है। जिसमें वीरता और प्रेम की कहानी है।

रासो काव्य हिंदी का अति विशिष्ट काव्य है। यह राजाओं का प्रशस्ति परक काव्य है। जिसमें वीरता और प्रेम की कहानी है। 

रासो काव्य की प्रमुख विशेषताएं

  • संदिग्ध प्रमाणिकता या ऐतिहासिकता
  • राष्ट्रीय चेतना का आभाव
  • काव्य का विषय राजाओं का शक्ति प्रदर्शन, भूमि हड़पना, किसी राजकुमारी को प्राप्त करना, युद्ध करना हैं।
  • राजाओं की अतिशयोक्ति प्रशंसा हैं
  • युद्ध का संजीव वर्णन है
  • इन काव्यो का प्रमुख रस वीर रस है। इसके श्रृंगार रस का भी चित्रण हुआ है। अन्य रस भी मिलते हैं।
  • यह राज दरबारों का काव्य है, जन सामान्य का नहीं
  • भाषा पुरानी हिंदी है
  • शैली - डिंगल एवं पिंगल
  • उपमा, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास, यमक, रूपक, अतिशयोक्ति, ध्वनि आदि अलंकारों का प्रयोग हुआ है।
  • दोहा, धत्ता, पाघड़ी, तोमर, स्त्रग्धरा आदि अपभ्रंश से आए छंदों का प्रयोग।

प्रमुख रासो काव्य

(1) पृथ्वीराज रासो : लेखक चंद्रवरदाई। चंद्रवरदाई दिल्ली के अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज तृतीय के सामंत और राजकवि थे। रासो काव्य का प्रतिनिधि व सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। आदिकाल का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रंथ है। पृथ्वीराज रासो का पिछला हिस्सा चंद्रवरदाई के पुत्र जल्हण द्वारा पूरा किया गया। यह वीरगाथात्मक रासो काव्य है। शुक्ल के अनुसार हिंदी का प्रथम महाकाव्य है।

काव्य रूप : प्रबंध काव्य, रस - वीर व श्रंगार, अलंकार - अनुप्रास व यमक।

काव्य गुण - ओज व माधुर्य गुण, भाषा - राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा, शैली - पिंगल।

(2) बीसलदेव रासो : लेखक - नरपति नाल्ह, श्रृंगार परक काव्य है। भाषा साहित्यिक नहीं, राजस्थानी हैं। यह काव्य संयोग और वियोग के गीत के रूप में मिलता है। वीर गीत के रूप में यह सबसे पुरानी काव्य रचना है।

(3) परमाल रासो : लेखक जगनिक। मूल रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका एक अंश उपलब्ध है जिसे 'आल्हा खंड' कहा जाता है। इसका छंद आल्हा या वीर के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो गीत के रूप में बरसात के समय गया जाता है।

(4) खुमाण रासो : लेखक - दलपत विजय (5) विजयपाल रासो : लेखक - नलसिंह भाट (6) संदेश रासक : लेखक - अब्दुर रहमान। यह एक विरह काव्य है। (7) हम्मीर रासो - शार्गंधर (8) जयमंयक जसचंद्रिका : लेखक - मधुकर (9) जयचंद प्रकाश : लेखक - भट्ट केदार।

रासो शब्द की उत्पत्ति

विद्वानरासो का अर्थ/किससे बना है 
रामचंद्र शुक्लरसायन
कवि राजा श्यामलदासरहस्य
डॉ. काशी प्रसाद जायसवालरहस्य
गार्सा द तॉसीराजसूय
बिंधेश्वरी प्रसाद दुबेराजयश
डॉ. हरप्रसाद शास्त्रीराजयश
डॉ. ग्रियर्सनराजादेश
डॉ. दशरथ शर्मारास या रासक
हजारी प्रसाद द्विवेदीरास या रासक
डॉ. माता प्रसाद गुप्तारास या रासक
विश्वनाथ प्रताप मिश्ररास या रासक
डॉ. गणपति चंद्रगुप्तरास या रासक

रासो शब्द की उत्पत्ति का क्रम इस प्रकार है : रासक > रासअ> रासउ > रासो

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. 1 शुक्ल के अनुसार हिंदी का प्रथम महाकाव्य है?
Ans : शुक्ल के अनुसार हिंदी का प्रथम महाकाव्य पृथ्वीराज रासो है।

Q. 2 रासो काव्य की प्रमुख विशेषताएं क्या है?
Ans : संदिग्ध प्रमाणिकता या ऐतिहासिकता, राष्ट्रीय चेतना का आभाव, काव्य का विषय राजाओं का शक्ति प्रदर्शन, भूमि हड़पना, किसी राजकुमारी को प्राप्त करना, युद्ध करना हैं,
राजाओं की अतिशयोक्ति प्रशंसा हैं, युद्ध का संजीव वर्णन है, इन काव्यो का प्रमुख रस वीर रस है, यह राज दरबारों का काव्य है, जन सामान्य का नहीं, भाषा पुरानी हिंदी है, शैली - डिंगल एवं पिंगल है।

Q. 3 प्रमुख रासो काव्य कौन कौन से हैं?
Ans : पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, खुमाण रासो, परमाल रासो, विजयपाल रासो, संदेश रासक, हम्मीर रासो, जयमंयक जसचंद्रिका, जयचंद प्रकाश आदि प्रमुख रासो काव्य है।
My name is Mahendra Kumar and I do teaching work. I am interested in studying and teaching competitive exams. My qualification is B.A., B.Ed., M.A. (Pol.Sc.), M.A. (Hindi).

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